रायपुर। छत्तीसगढ़ में मिड-डे मील योजना से जुड़ी लगभग 87 हजार रसोइया (कुक) अनिश्चितकालीन हड़ताल पर उतर आई हैं। राज्य के अलग-अलग जिलों में रसोइयों ने प्रदर्शन कर अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखीं। इस आंदोलन का सीधा असर सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजन पर भी पड़ने लगा है।
🔎 हड़ताल की प्रमुख वजहें
मानदेय बेहद कम: रसोइयों का कहना है कि उन्हें मिलने वाला मानदेय आज की महंगाई के हिसाब से नाकाफी है।
समय पर भुगतान नहीं: कई जिलों में महीनों तक भुगतान अटका रहने की शिकायतें सामने आई हैं।
स्थायी दर्जा नहीं: वर्षों से काम करने के बावजूद इन्हें संविदा/स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला।
सामाजिक सुरक्षा का अभाव: बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी बुनियादी सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
📣 रसोइयों की मांगें
मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि
भुगतान की निश्चित समय-सीमा
स्थायीकरण/सुरक्षा लाभ (बीमा, पेंशन)
कार्य के अनुरूप काम के घंटे और सुविधाएं
⚖️ सरकार का पक्ष (सूत्रों के अनुसार)
सरकारी स्तर पर यह कहा गया है कि मांगों पर विचार प्रक्रिया जारी है और संबंधित विभागों से रिपोर्ट मंगाई गई है। प्रशासन ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने के संकेत दिए हैं।
✍️ संपादकीय दृष्टिकोण
मिड-डे मील योजना बच्चों के पोषण और स्कूल उपस्थिति के लिए अहम है, लेकिन इसे सफल बनाने वाली रसोइयों की अनदेखी लंबे समय से होती रही है। वर्षों की सेवा के बाद भी यदि उन्हें न्यूनतम आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिलती, तो असंतोष स्वाभाविक है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि संवेदनशीलता और त्वरित संवाद के साथ व्यावहारिक समाधान निकाले, ताकि बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों प्रभावित न हों।
डिस्क्लेमर: यह सामग्री सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी व विभिन्न माध्यमों में आई रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार की छवि को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दे पर तथ्यात्मक व संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है।

